भक्ति कंटेंट (Bhakti Content)

महामृत्युंजय मंत्र — श्लोक, अर्थ, जप विधि और लाभ

ऋग्वेद का सबसे शक्तिशाली संजीवनी मंत्र जो अकाल मृत्यु और समस्त व्याधियों से रक्षा करता है।

महामृत्युंजय मंत्र — श्लोक, अर्थ, जप विधि और लाभ

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ सरल भावार्थ: हम त्रिनेत्रधारी (भूत, वर्तमान और भविष्य के दृष्टा), सुगंधित और समस्त सृष्टि का पोषण करने वाले भगवान शिव की आराधना करते हैं। जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी कष्ट के अपनी बेल के बंधन से मुक्त हो जाता है, उसी प्रकार हम भी मृत्यु और संसार के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष (अमृतत्व) को प्राप्त हों।

मंत्र जाप के लाभ एवं महिमा

महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार रुद्राक्ष की माला से जाप करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व दीर्घायु का वरदान मिलता है।