श्री हनुमान चालीसा — सम्पूर्ण पाठ, अर्थ एवं विधि
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित संकटमोचन श्री हनुमान जी के 40 चौपाइयों का पावन व सिद्ध स्तोत्र।
श्री हनुमान चालीसा — सम्पूर्ण पाठ, अर्थ एवं विधि
॥ दोहा ॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
(अर्थ: अपने गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके, मैं श्री रघुवीर के उस निर्मल यश का गान करता हूँ जो चारों फल—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला है। हे पवनपुत्र, मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें तथा मेरे समस्त क्लेशों और विकारों को हर लें।)
मंत्र जाप के लाभ एवं महिमा
नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, भूत-प्रेत बाधा, तनाव और असाध्य रोगों का नाश होता है। यह आत्मविश्वास, बल, बुद्धि और शनि-राहु दोषों से रक्षा प्रदान करता है।