प्रदोष व्रत कथा एवं शिव पूजा विधि
प्रत्येक त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना — समस्त कष्ट और कर्ज निवारण।
प्रदोष व्रत कथा एवं शिव पूजा विधि
पौराणिक कथा (Story)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मणी अपने पुत्र और एक अनाथ राजकुमार के साथ रहती थी। उसने ऋषि शांडिल्य के आदेश पर प्रदोष व्रत करना शुरू किया। भगवान शिव की कृपा से राजकुमार को अपना खोया हुआ राज्य वापस मिला और ब्राह्मणी के परिवार के सारे कष्ट समाप्त हो गए।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने से गंभीर रोगों, शत्रुओं और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है तथा मनवांछित फल प्राप्त होते हैं।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
शाम को सूर्यास्त के समय स्नान कर सफेद वस्त्र पहनकर शिवलिंग का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और शिव चालीसा व रुद्राष्टकम का पाठ किया जाता है।