निर्जला एकादशी व्रत कथा एवं विधि
समस्त 24 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ — बिना जल ग्रहण किए किया जाने वाला महाव्रत (भीमसेनी एकादशी)।
निर्जला एकादशी व्रत कथा एवं विधि
पौराणिक कथा (Story)
महाभारत काल में जब पांडव एकादशी व्रत रखते थे, तब भीम अपनी तीव्र भूख के कारण व्रत नहीं रख पाते थे। महर्षि वेदव्यास जी ने भीम को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का निर्जल (बिना अन्न-जल) व्रत रखने का उपाय बताया। इस एक व्रत को करने से वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
इस व्रत को करने से व्यक्ति दीर्घायु, आरोग्य और मोक्ष को प्राप्त करता है। यह तप, संयम और ईश्वर के प्रति अनन्य समर्पण का प्रतीक है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक निर्जला व्रत रखा जाता है। राहगीरों को मीठा शर्बत पिलाना, जल से भरे मटके, पंखे और मौसमी फलों का दान करना महापुण्यकारी माना जाता है।