मकर संक्रांति
सूर्य देव के उत्तरायण होने और फसल कटाई का पवित्र पर्व — दान, पुण्य और सूर्य उपासना।
मकर संक्रांति
पौराणिक कथा (Story)
मकर संक्रांति वह पावन खगोलीय दिन है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है। गंगा सागर और प्रयागराज में स्नान का विशेष महत्व है।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी और वस्त्रों का दान करने से सौ गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। यह पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश के आगमन का प्रतीक है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य, तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी का दान किया जाता है। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाई जाती हैं।