महाशिवरात्रि
भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन और सृष्टि के कल्याण का महापर्व।
महाशिवरात्रि
पौराणिक कथा (Story)
महाशिवरात्रि देवाधिदेव महादेव की आराधना का सबसे बड़ा महापर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन रात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ था। एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट हलाहल विष निकला, तो भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था और वे नीलकंठ कहलाए।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
महाशिवरात्रि आत्म-साक्षात्कार, आंतरिक अज्ञानता के नाश और मोक्ष प्राप्ति का पर्व है। इस पावन रात्रि को जागरण और ध्यान करने से मन के सारे विकार शांत होते हैं तथा भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा प्राप्त होती है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
भक्तगण पूरे दिन और रात्रि निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। रात्रि के चारों प्रहर में शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद से रुद्राभिषेक किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, भांग और भस्म अर्पित करके महामृत्युंजय मंत्र और "ॐ नमः शिवाय" का अखंड जाप किया जाता है।