भक्ति कंटेंट (Bhakti Content)

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व — प्रेम, भक्ति और गीता के ज्ञान का संदेश।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

पौराणिक कथा (Story)

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कंस के क्रूर अत्याचारों से धर्म और भक्तों की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने पूर्णावतार लिया। पिता वसुदेव जी ने बालक कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर सुरक्षित पहुँचाया।

आध्यात्मिक महत्व (Importance)

श्री कृष्ण जन्माष्टमी प्रेम, आनंद और कर्मयोग का उत्सव है। भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से मानव कल्याण का अमर संदेश दिया। इस दिन व्रत और पूजन करने से जीवन में संतान सुख, समृद्धि और परम भक्ति की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)

घर-घर और मंदिरों में लड्डू गोपाल के लिए सुंदर झूले सजाए जाते हैं। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे प्रभु का पंचामृत अभिषेक कर माखन-मिश्री, पंजीरी और 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। अगले दिन दही-हांडी और मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं उत्साहपूर्वक मनाई जाती हैं।