जगन्नाथ रथ यात्रा
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की विश्व प्रसिद्ध भव्य रथ यात्रा (पुरी धाम)।
जगन्नाथ रथ यात्रा
पौराणिक कथा (Story)
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यह संसार का एकमात्र ऐसा उत्सव है जहां भगवान स्वयं मंदिर से बाहर आकर अपने सभी भक्तों को दर्शन देते हैं।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
मान्यता है कि रथ यात्रा में भगवान के रथ की रस्सी खींचने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का क्षय होता है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
पुरी में लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। राजा द्वारा सोने की झाड़ू से रथ के रास्ते को बुहारने (छेरा पहंरा) के बाद जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ रथ खींचे जाते हैं।