होली (रंगोत्सव)
प्रेम, सौहार्द और वसंत के आगमन का महापर्व — होलिका दहन और रंगों का पावन उत्सव।
होली (रंगोत्सव)
पौराणिक कथा (Story)
फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन और अगले दिन रंगों की होली (धुलंडी) मनाई जाती है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की अटूट नारायण भक्ति और भगवान नृसिंह द्वारा धर्म की रक्षा का प्रतीक है। इसके साथ ही ब्रजभूमि में राधा-कृष्ण के आलौकिक प्रेम की लट्ठमार और फूलों की होली खेली जाती है।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
होली आपसी मतभेद मिटाकर गले मिलने और जीवन में उमंग व सकारात्मकता भरने का संदेश देती है। होलिका दहन में बुराइयों और अहंकार की आहुति देकर नए जीवन की शुरुआत की जाती है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
होलिका दहन के दिन पवित्र अग्नि में गोबर के उपले, गेहूं की बालियां और नारियल अर्पित किए जाते हैं। अगले दिन अबीर-गुलाल लगाकर गुजिया और ठंडाई का आनंद लिया जाता है।