गणेश चतुर्थी
विघ्नहर्ता, बुद्धि के प्रदाता भगवान श्री गणेश के आगमन का भव्य और मंगलकारी उत्सव।
गणेश चतुर्थी
पौराणिक कथा (Story)
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। माता पार्वती ने अपने उबटन से बालक गणेश की रचना की थी। जब भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया और हाथी का शीश लगाकर पुनर्जीवित किया, तब से गणेश चतुर्थी का पर्व संपूर्ण ब्रह्मांड में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
गणेश जी बुद्धि, विवेक और समृद्धि के देवता हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले श्री गणेश की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा की स्थापना करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और खुशहाली आती है तथा समस्त संकटों का निवारण होता है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
लोग अपने घरों और पंडालों में मिट्टी के सुंदर गणपति स्थापित करते हैं। 10 दिनों तक विधि-विधान से पूजा, मोदक, दूर्वा, लाल सिंदूर और गुड़हल के फूल अर्पित किए जाते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के जयकारों के साथ विसर्जन किया जाता है।